Friday, July 30, 2010

कम्बख़्त नींद

उजड़े हुए नैन
ढूँढ रहे हैं उस सपने को
जिसने अगले रोज़ नींद में
आने का वादा किया था|

कम्बख़्त नींद ही नही आई
तो सपना कहाँ से आए?

(C) shubhra, July 30, 2010

Wednesday, July 28, 2010

खुली आँख का सपना...

खुली आँख से जो सपना देखूं
तो शायद तुझको पा लूँ,
बंद आँखों के सपनो पर मेरा बस कहाँ|

(C) shubhra, July 28, 2010