Skip to main content

तुम्हारे जन्मदिन पर...


तुम्हारे जन्मदिन पर...

क्या दूं तुम्हे...
एक दुआ कि
तुम खुश रहो
आबाद रहो
मुस्कुराते रहो

खुशियों में ऩफा
ग़म में नुकसान हो
सेहत में इज़ाफ़ा
काम और नाम में बरकत हो

उम्र कि
गिनती
सालों से नही लम्हो से हो...

प्यार, शांति, सुकून
आने वाले साल में ये

सब तुम्हारा हो
आने वाला साल

तुम्हारे लिए अच्छा हो
यही मेरा तोहाफा
यही मेरी दुआ...
जन्मदिन मुबारक हो!!!

शुभ्रा
24 December 2008 1230 am

Comments

Straight Bend said…
This was ok. No punch :(
daanish said…
dil ki gehraaee se nikli duaaeiN
aksar sunn li jaati haiN.....
iss achhi nazm meiN kahi gayi har dua qubool ho..yahi dua hai...
---MUFLIS---
Anonymous said…
दुआ बनकर जो छा जाए जीवन में उसकी तलाश है
हम तो अकेले थे लेकिन अब हमसफर की आस है
रास्ता बड़ा मुश्किल था लेकिन अब मंजिल पास है
जो सुन ले दिल की अनकही उसकी सांस ही आवाज़ है
कहतें हैं वो कि हमारे हो जाएंगे लेकिन दूरी बढ़ाने में उस्ताद हैं
अब तो बता ही दीजिए कि कैसे आपके मिजाज़ हैं

Popular posts from this blog

"Love you" doesn't mean love anymore!!

We live in strange times what is seen is never shown what is heard, never said what is felt is not what's expressed "Love you" doesn't mean love anymore "hate you" doesn't mean hate either "sorry" is no longer a regret "thank you" no more an expression of gratitude "I am ok" never means things are alright and nothing is well in "I am well" and "all is well" "nice" no longer is so nice, and "that's ridiculous" may not be that bad A lifetime is spent deciphering meanings Reading between the lines and looking beyond the words Is a skill essential straightforward conversations are rare and life status always complicated... ...because We live in strange times...here "Love you" doesn't mean love anymore!! (c) shubhra December 24, 2015

मेरी टेबल पर एक डब्बा है

मेरी टेबल पर एक डब्बा है जिसमें बहुत सी टूटी हुई चीजें हैं फ्रिज मैगनट, पेन, झुमके, खिलौने आदि वो वहां इसलिए हैं कि उन्हें जोङना है कमबख्त वक्त ही नही मिला इस के लिए। फिर कल डब...

अप्रैल का महीना

अप्रैल का महीना थोड़ा नर्म थोड़ा गर्म सन्तरा भी मिलता है और आम भी गोभी भी और भिंडी भी गरम पानी से नहाते है और कार में ऐसी चलाते हैं नए साल के प्लान बनाते हैं  बीते साल के बही खाते टटोलते हैं  अप्रैल का महीना थोड़ा नर्म थोड़ा गर्म ऐसे ही एक साल  काफी गरम था  अप्रैल का महीना  अस्तित्व पिघला  पहचान पिघली  आमदनी पिघली  लावा ही लावा था सब तरफ  महीने बीते जलते जलते...  फिर इस लावे में कुछ रंग मिलाए  कुछ हिम्मत जुटाई  कुछ इरादे किए  कुछ मदद मांगी  काफी तपस्या की  काफी कुछ त्यागा  इस अप्रैल के महीने से शुरुआत हुई एक नए सफर की  मालूम नहीं था तब क्या अंजाम होगा  सही गलत, अच्छा बुरा कौन जाने  बस रंगों के साथ उधेडः-बुन में लग गए  कभी जद्दोजहद, मायूसी, नाकामयाबी  कभी पुरूस्कार, तारीफ और छोटी छोटी खुशियां  कई पड़ाव पार किये...  आज इस अप्रैल के महीने में  आज ही के दिन  पंद्रह साल पूरे हुए  उस पिघलती दोपहर के  जब ज्वालामुखी फटा था  और लावा बहा था  वहाँ आज एक न...