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Showing posts from July, 2009

अब तो बरसो...

कब से भरे हुए थे बादल
आखिर हार कर बरस ही पड़े

मन अब भी समेटे हुए है सब कुछ
बाँध की दीवार हो जैसे बाढ़ को थामे....

न रोक इस बरसात को, ए मन
न डर तू, कि भीग जाएगा

वो सावन ही कैसा
जिसमे तन और मन ना भीगे

शुभ्रा, जुलाइ 28, 2009