Wednesday, December 27, 2006

I want

I want

to fly high like a bird
to swim deep like a fish
to flow freely like a river
to wander like a thought

no limits
no ifs
no buts
no yes
no no

to break free
to let go
to fly high
to swim deep
to be me

I am

a prisoner of my own thoughts
limited by my own self
bounded by my own belief

I want

to break free
to let go
to break free
to be me

Shubhra
composed on 27/12/06 at 1 am

आँखें

नींद भरी आँखें
न सोती न जगती आँखें
न कुछ कह कर भी
सब कुछ कहती आँखें
रोज़ नये ख्वाब देखती आँखें
प्यार की खुशी से दमकती आँखें
यार के इंतज़ार में मचलती आँखे
नज़रों में लम्हात बटोरती आँखें
रोज़ कयी ख्वाब बुन्ति आँखें

गम में नम आँखें
टूटे ख्वाबों पर रोती आँखें
यार की जुदाई में उदास आँखें
अपने माज़ी को हर शय में खोजती आँखें
अश्कों को पलकों पर रोकती आँखें

मन का आईना हैं आँखें
ख्वाबों की तस्वीर हैं आँखें
झरोखा मेरी दुनिया का, ये आँखें
ये ख़ामोश आँखें, मेरी ख़ामोश आँखें

शुभ्रा
27/12/06 at 1 am